शनिवार, 11 अप्रैल 2009

ओशो गार्डन पेसे ली गयी कल्पना ...

Friday, November 25, 2005

Garden path & its detail.
An abundance of stiches & some color on hand woven cotton।( पुनेके ओशो गार्डन पेसे ये कल्पना ली मैंने...उसमे अपने मनसे कुछ बदलाव लाये गए हैं....)इसमे कई सारे कढाई के टांकों का इस्तेमाल किया है....बगीचेमे भरे रंग और फूलोंकी कल्पना अपने मनसे की है....)

3 टिप्‍पणियां:

चंदन कुमार झा ने कहा…

बहुत सुन्दर कृतियां है ये.....मैने सारे देखे.एक एक करके आपका सारा ब्लाग देख रहा हूँ मैं.

मेरे ब्लाग पर आने के लेये धन्यवाद.आभार.

गुलमोहर का फूल

DEV ने कहा…

Splendid Dear, Love it.

नीरज गोस्वामी ने कहा…

धागों का इतना सुन्दर इस्तेमाल इस से पहले कहीं नहीं देखा...
नीरज