बुधवार, 29 अप्रैल 2009

पँछी

Old Birds

पहले चित्रमे सोफा, परदे, आदिके सैम्पल के टुकड़े/बचे हुए तुकडे इस्तेमाल किए गए हैं.
लाल परिंदा सिर्फ़ धागोंसे बनाया है..इसमे कहीँ कोई पेंट नही...ब्रश के स्ट्रोक्स का इफेक्ट, धागोंसे ही दिया है.
इस चित्रमे फूल/पत्ते तो पेंट किए हैं, चिडिया कढाई कर के बनाई है।
इस चित्रमे केवल कढाई की गयी है। पँछी की कढाई ( सभी जगह) असली तस्वीरोंपरसे बनाई गयी है...जैसे world encyclopedea of birds आदि)
पँछी को काढ़ते समय उसके पर और पँख, तथा आँखें, ये दो चीज़ें बेहद एहमियत रखती हैं....


1 comments:

ruby snail said...

Hello! I came across this blog through Craftster. You are such an AMAZING artist. I am in awe. I only hope someday to have such a brilliant eye for detail, Thank-You! Love from Ruby.

8 टिप्‍पणियां:

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

दीदी! मैं संवेदनाहीन सा बंदा हूं ऐसा लोग कहते हैं मेरे बारे में कि भला मैं क्या जानूं कि कला क्या होती है लेकिन जो आंखों से आत्मा तक सुहाए वही कला है,आनंदित करे.... बेहतरीन कार्य है पीढ़ियों के लिये ये काम सुरक्षित हो गया ब्लाग पर आकर। पूरी ऊर्जा से लगी रहिये। ईश्वर आपको उत्तम स्वास्थ्य और महत्तम रचनात्मक ऊर्जा दे।

'sammu' ने कहा…

bahut sundar ! aapme sundarya dristi hai jo man ko choo letee hai .

Science Bloggers Association ने कहा…

बहुत सुन्दर कलाकारी।
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किस्म किस्म के आम
क्या लडकियां होती है लडको जैसी

raj ने कहा…

hi...main aapke har blog pe gyee....amazing....realy wonderful...pics r so so nice...m ofcourselikha boht achha hai bagwani me bhi.....

ओम आर्य ने कहा…

realy its too good ........

नीरज गोस्वामी ने कहा…

बेमिसाल कलाकारी...मेरे पास प्रशंशा के लिए लफ्ज़ नहीं हैं...लाजवाब...वाह...खुदा एक ही इंसान में इतने सारे हुनर क्यूँ डाल देता है...बहुत ना इंसाफी है ये उसकी...आप कमाल की कलाकार हैं...
नीरज

नीरज गोस्वामी ने कहा…

परिंदे इतने जीवंत हैं की लगता है बस चह चहा उठेंगे अभी....सलाम आपके इस हुनर को...बेमिसाल...
नीरज

Prafull ने कहा…

You have been blessed with a brilliant artistic sense. People like you only make this world a beautiful place.
with high regards