शनिवार, 4 जुलाई 2009

कुछ और पँछी...








यहाँ पे मैंने काफ़ी कुछ पुराने ज़री के तुकडे, कढाई, कमख्वाब, लेस, सिल्क के तुकडे, और लाल रंग के परिंदे के लिए, पार्श्व भूमी मे रंगीन नेट का इस्तेमाल किया है...
एक चित्र,( लाल पँछी) जो, असली परिंदे की एक तस्वीर परसे बनाया है, बाकी सब, काल्पनिक हैं...सबसे पहला तो उल्लू है, ये नज़र आही रहा है!!
(उल्लू बड़े अच्छे लगते हैं...उन्हीं जाती-प्रजाती मै जो शामिल हूँ..!)
अन्तिम कढाई, आदिवासी जो चित्र कलामे रेखाटन करते हैं, उस तरह धागों से बनाई है...

17 टिप्‍पणियां:

Anya ने कहा…

Fantastic art :)
Its beautiful !!

प्रशांत गुप्ता ने कहा…

bahut khub

शरद कोकास ने कहा…

मैने उल्लू पर एक कविता लिखी थी सो याद आ गई
.. "मुझे नीन्द नही आ रही है आ रही हैं /आ रहे हैं /ऊलज़लूल विचार / विचारों का यह प्रकार कितना मिलता है उल्लुओं के नाम से /उल्लू क्या दिन को सोता है उसे नौकरी नही करनी पडती मेरी तरह शायद/ उल्लू तो खैर उल्लू होता है / उल्लू का नौकरी से क्या / लेकिन उल्लू क्या प्रेम भी करता है/ क्या पता /फिर वह क्यों जागता है रात भर / मै भी कितना उल्लू हूँ / जो उल्लू और आदमी के बीच/ खोज रहा हूँ एक मूलभूत अंतर --- बहरहाल रात रात भर जाग कर काम करना बन्द कीजिये वैसे ही आपका यह पूरा क्रियेशन बहुत सुन्दर है -टिप्पणीकर्ता -एक उल्लू

abdul ने कहा…

fabulous art

abdul hai ने कहा…

fabulous art

प्रदीप कांत ने कहा…

Very nice work

M VERMA ने कहा…

(उल्लू बड़े अच्छे लगते हैं...उन्हीं जाती-प्रजाती मै जो शामिल हूँ..!)
बहुत सुन्दर कला. उल्लू प्रजाति मे आप भी है जानकर अच्छा लगा नही तो मै सोचता था कि केवल मै ही ----- !!

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

शमा दी, इतना सुन्दर काम है आपका कि तारीफ़ को शब्दों में नहीं बांध सकती!!सोचती हूं, मै भी ऐसा कुछ कर सकती हूं क्या? शायद नहीं

Prafull ने कहा…

These are really beautiful. Sorry to mention oft repeated Victor Hugo, yet it fits here, " A thing of beauty is a thing of joy forever."

By the way do you have 24 hrs or more?

Meenu khare ने कहा…

अगर आपका संस्मरण वाल ब्लॉग न पढा होता तो पूछ्ती इतनी सुन्दर कलाकृतियाँ आपको कहाँ से सूझीं पर अब तो इनका उद्गम आसानी से समझ आ रहा है...

प्रत्युष खरे ने कहा…

उम्दा कलाकृतियां हैं कितनी मेहनत और संजीदगी से बनाई गई होंगी,अंदाज़ा लगाया जा सकता है वाकई में कमाल है...

Mera Akash ने कहा…

Shamaa Ji, aapki kavitaaye padi, magar chaah kar bhi comment dene me kamyab nahi ho saki, shayad kuchh technical locha hai. phir aapka art work dekha, shukra hai is par comment de pa rahi hu.Aapke saare bhav sundar hai, chahe wo poem ho ya art-work.Aapse jud kar achchha laga aur jude rahna chahati hu........!

Pratima Sinha from MERA AKASH ...!

Basanta ने कहा…

Very beautiful creations! They seem so lively!

Bhagyashree ने कहा…

great work Shama

ज्योति सिंह ने कहा…

shama ji kala meri kamjori hai ,bachpan inhi ke beech gujara ,aaj aapki is adbhut kala kriti dekh man kaash par thahar afsos liye rah gaya ,ye soch aapka saath mila hota lutf hum bhi kam na uthaye hote .aap to behad guni hai .yaa yu kahe -you are multitalented .jitne blog dekhe ek se badhkar ek .

Uncommon Sense ने कहा…

hey those are beautiful,, bahut time lagta hoga ye banane me

vinay ने कहा…

आपकी कला तो,अच्छी तो लगी ही,और उल्लु अच्छे लगते है,उनकी प्रजाति में से जो हूं,मन को गुदगुदा गया ।