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गुरुवार, 1 अक्टूबर 2009

सूखा झरना!

इस तस्वीर की एक दूरसे ली छवी पोस्ट कर चुकी थी...ये पाससे ली है...ऊँचें रचे हुए पत्थरों पे नदीओं में मिलने वाले सफ़ेद, गोल पत्थर डाल रखे थे....पानी की फुहार सुराही में से निकलता थी जिसे water sculpture ..कहा जाता है...यहाँ पे फाइबर के बने लैंप लगाये थे, जब रातमे जलाये जाते थे, तो लगता था पत्थर से छनके रौशनी आ रही है....अब ये कवल तस्वीरें बगीचे तो रहे नही...बगीचों की आसान तरीक़ेसे बनानेके लिए ये कुछ सुझाव मात्र हैं!
इस तस्वीर को इस ब्लॉग पे डालने की वजह है,कि, इस भी मै अपने 'फाइबर आर्ट'मे तब्दील कर चुकी हूँ...किसी दिन उसकी तस्वीर भी पोस्ट कर दूँगी...!

शनिवार, 11 अप्रैल 2009

ओशो गार्डन पेसे ली गयी कल्पना ...

Friday, November 25, 2005

Garden path & its detail.
An abundance of stiches & some color on hand woven cotton।( पुनेके ओशो गार्डन पेसे ये कल्पना ली मैंने...उसमे अपने मनसे कुछ बदलाव लाये गए हैं....)इसमे कई सारे कढाई के टांकों का इस्तेमाल किया है....बगीचेमे भरे रंग और फूलोंकी कल्पना अपने मनसे की है....)